इंदौर

मामला सरवटे बस स्टैंड हादसे का निगम की कार्यप्रणाली शंका के घेरे में

Deepak Sungra - indoreexpress.com 02-Apr-2018 05:26 am


इंदौर (सुरेश कपोनिया)।
सरवटे बस स्टैण्ड पर शनिवार रात गिरी चार मंजिला एमएस होटल में जहां चार लोग दबकर मर गए थे। वहीं बस स्टैण्ड के आसपास जितनी भी होटलें, लॉज बने है उन सभी में अवैध निर्माण बताया गया है। होटल मालिकों ने अधिक कमाई के लिए यह निर्माण किए और लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे है। कई जगह तो नगर निगम से दो मंजिला की अनुमति थी, लेकिन चार से पांच मंजिला निर्माण वर्तमान में किया हुआ है, जिससे होटल खतरनाक दिखती है। नगर निगम जहां सडक़ चौड़ीकरण के लिए स्टे लाने वालों तक के मकान तोड़ देता है वहीं शहर के बीचो बीच इतनी सार जर्जर बिल्डिंगों को कैसे भूल गया। निगम ने आज तक किसी भी होटल के नक्शों की जांच नहीं की न ही मैदानी जांच की जिससे गड़बड़ी उजागर हो सके। यदि इंजीनियरों ने जांच की भी हो तो पैसे लेकर मामला रफा-दफा कर दिया गया। एमएस होटल की घटना से तो यही प्रतीत होता है।
10 मौत के बाद जहां महापौर मालिनी गौड़, कलेक्टर निशांत वरवड़े, निगमायुक्त मनीष सिंह और डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र जांच की बात कह रहे है। वहीं पूरे शहर में तनी अवैध बिल्डिंगों पर पहले क्यों नहीं जांच और कार्रवाई की गई यह सवाल उठता है। एमएस होटल में कही भी न तो कॉलम था न ही सरिये लगाए गए थे जिससे उसे मजबूती मिले। बस स्टैण्ड के आसपास सभी होटलें अवैध रूप से चल रही है। अधिकांश होटलों में नियमों के विपरीत तीन से चार मंजिला निर्माण कर लिया गया और इसमें निगम अधिकारी, पुलिस अधिकारी, जनप्रतिनिधि से लेकर तमाम जिम्मेदार भी लिप्त है। किसी ने भी इन होटलों की जांच और कार्रवाई को लेकर अब तक कोई ठोस पहल नहीं की। अधिकांश होटलें 40 से 50 साल पुरानी है। अर्थात यह सभी होटलें एक तरह से मौत का घर है और शनिवार को 10 लोगों की मौत ने इसे साबित कर दिया। एमएस होटल से अचानक एक कार टकराई और चंद सेकंड में पूरी होटल ही भरभराकर गिर गए।
गुरुकृपा होटल के पास में एक डिस्कोथेक भी खुला है जिसकी बिल्डिंग भी कई बार खतरनाक हो जाती है और रात में यहां जब पार्टी चलती है तो बिल्डिंग गिरने का अंदेशा बना रहता है। लोगों ने कई बार बिल्ंिडग मालिक को इसकी शिकायत की, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। नगर निगम और पुलिस विभाग भी इस जर्जर बिल्डिंग से अच्छी तरह वाकिफ है।
होटलों में जहां ऊपर अवैध निर्माण कर लिए गए। वहीं तलघर और तलमंजिल पर भी अवैध निर्माण करते हुए किराये पर दे दिया गया। बाहर से आने वाले लोग मुख्य रूप से विद्यार्थियों को हजार से दो हजार रुपए में कुछ घंटों के लिए यहां किराये पर पलंग दिए जाते है और अवैध कमाई की जाती है। 6 बाय 6 के अवैध निर्माण में कई जगह परदे लगे है और मिट्टी व लकड़ी से ही पूरा निर्माण कर दिया गया जिससे कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है। निगम अधिकारियों ने इन अवैध निर्माण में कभी कोई जांच नहीं की। होटल मालिकों व मैनेजरों से मिलकर अधिकारियों ने भी खूब काली कमाई की।
बस स्टैण्ड के आसपास वर्तमान में भी 5 से 7 जगहों पर होटलों में अवैध निर्माण चल रहा है। क्षेत्रीय झोन के इंजीनियरों ने इन पर कोई ध्यान नहीं दिया। मुख्य रूप से झोन के बिल्डिंग दरोगा जांच करते है और रिपोर्ट बिल्डिंग इंस्पेक्टर को देते है। इसके बाद बिल्डिंग ऑफिसर आगे कार्रवाई करता है, लेकिन अवैध निर्माण को लेकर किसी भी अधिकारी, कर्मचारी ने कोई ध्यान नहीं दिया और धड़ल्ले से अवैध निर्माण किया जा रहा है। इस अवैध निर्माण में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की भी कहीं न कहीं मिलीभगत बताई गई है।

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