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कार्रवाई के बाद सैकड़ों ट्रक मलबा सडक़ पर ही पड़ा

Deepak Sungra - indoreexpress.com 11-Jan-2018 04:06 am


इंदौर (सुरेश कपोनिया)।
बुधवार को हुई मच्छी बाजार, जूना पीठा के सडक़ निर्माण के दौरान हटाए गए बाधकों का मलबा अभी भी नहीं उठ पाया है। रात के क्षेत्र के रहवासियों ने इसी पर बैठकर चर्चाएं की। बताया गया है कि यह मलबा कोर्ट के निर्णय के बाद ही उठना शुरू होगा। जवाहर मार्ग के यातायात को कम करने के उद्देश्य से यह वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जा रहा है। यह मार्ग तैयार होने के बाद यह क्षेत्र भी व्यापारिक इलाका बन जाएगा।
सरवटे से गंगवाल बस स्टैंड तक बनने वाली सडक़ के महत्वपूर्ण क्षेत्र मच्छी बाजार, नयापीठा व सिलावटपुरा के बाधक हटाया जाना निगम के लिए काफी मशक्कत भरा था। कल इसकी कार्रवाई शुरू की गई, लेकिन कोर्ट के आदेश के चलते कार्रवाई रोक दी गई। हालांकि काफी हद तक बाधक हटाए जा चुके हैं। नए पीठे में मटन मार्केट के आगे के निर्माण हटाए जाना है। कोर्ट के आदेश के इंतजार में निगम ने यह कार्रवाई रोकी है। कल की गई कार्रवाई के दौरान सै$कड़ों ट्रक मलबा यहां सडक़ों पर बिखरा पड़ा है। लेकिन अभी यह हटाया नहीं गया है। रात के क्षेत्र के रहवासी इसी पर बैठकर चर्चारत रहे। जवाहर मार्ग के वैकल्पिक मार्ग के लिए यह मार्ग तैयार किया जाना है। जवाहर मार्ग पर यातायात का इतना दबाव बढ़ गया है कि दोपहिया वाहन भी चलाना मुश्किल हो गया है और प्रतिदिन यहां जाम लगता रहता है। इसी के मद्देनजर यह मार्ग निगम द्वारा तैयार किया जा रहा है। उक्त मार्ग तैयार होने के बाद यह सडक़ भी पूरी तरीके से व्यापारिक क्षेत्र बन जाएगी, वहीं शहर के नागरिकों को जवाहर मार्ग के बिगड़ते यातायात से मुक्ति मिल जाएगी। हालांकि अभी कई बाधक हटाए जाना है, वहीं सिलावटपुरा व गंगलाव बस स्टैंड का पूरा मार्ग के बाधक भी हटाए जाना है। सम्पूर्ण बाधक हटाए जाने के बाद निगम को यहां 6 माह के लगभग सडक़ बनाने में लग जाएंगे। उक्त 80 फीट चौड़ी रोड बनने के बाद पश्चिम क्षेत्र के साथ साथ अन्य क्षेत्रों में भी यातायात का दबाव कम हो जाएगा।
निगम कर्मी ने तीन पेटी शराब उड़ाई
एक ओर जहां निगम कर्मचारी कड़ाव घाट क्षेत्र में सडक़ चौड़ीकरण और निर्माण के लिए निर्माण तोड़ रहे थे, तो सामान शिफ्ट के बहाने उन्होंने यहां संचालित होने वाली कलाली से मौके का फायदा उठाकर तीन पेटी शराब भी गायब कर दी। ठेकेदार रमेश शिवहरे को शिकायत है कि निगम कर्मियों को हमारे साथ तो रियायत करनी थी। इस संवाददाता से चर्चा के दौरान रमेश शिवहरे ने बताया कि न तो यहां लेटबॉथ है और न हम परिवार के साथ रहते हैं। 31 मार्च को हमारा ठेका वैसे भी खत्म हो जाता। अभी तो निर्माण कार्य कोर्ट और स्टे के चलते टूट रहे हैं और रूक रहे हैं और हम तो इस जगह का किराया अदा कर रहे हैं हमारा तो कब्जा ही नहीं है। फिर भी निगम ने हमारे साथ रियायत नहीं की। कलाली तो ऐसे गिरा दी, जैसे कल से ही यहां सडक़ बनना शुरू होने वाली हो। ताबड़तोड़ हमारा सामान बाहर निकाल दिया और इस चक्कर में निगमकर्मियों ने तीन पेटी माल गायब कर दिया। आप खुद ही बताइए भारी पुलिस फोर्स के बीच हमारे माल को निगमकर्मी के अलावा कोई हाथ तो लगा नहीं रहा था अब हम शराब चोर किसे माने।

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